पिछले 24 घंटों में हिंदुओं ने जिस तरह से बागेश्वर धाम सरकार के समर्थन में सोशल मीडिया पर सुनामी लाई है,ये देखकर सनातन विरोधियों की नींद उड़ गई है। ये सिलसिला रूकना नहीं चाहिए...
बात ये नहीं है कि बागेश्वर वाले बाबा के पास चमत्कारिक शक्तियां हैं कि नहीं .....
बात ये नहीं है कि उन्हें वेद मंत्रों का सही ज्ञान है या नहीं .....
बात केवल इतनी है कि यदि वो अज्ञानी भी हैं तो भी वो श्रेष्ठ हैं क्योंकि वो राष्ट्रवाद के साथ खड़े हैं और कई निकृष्ट जो भ्रमित करते हैं वो यदि ज्ञानी भी हैं तो भी वो सम्मान पाने योग्य नहीं ।
जो भी राष्ट्रवाद के साथ खड़ा है वह पूज्य है । मैं बागेश्वर धाम सरकार वाले धीरेंद्र शास्त्री के साथ हूँ और जब तक वो हिन्दू हित में लगे रहेंगे हर राष्ट्रवादी उनके साथ रहेगा ।
जरुरी यह नहीं है कि आप बागेश्वर धाम गये या नहीं गये, जरुरी यह भी नहीं है कि आप धीरेन्द्र शास्त्री जी को जानते हैं या नहीं जानते हैं पर्सनल, मैं भी नहीं जानता , गया भी नहीं बागेश्वर धाम
लेकिन जो धर्म ध्वजा हाथ में लेकर है उसका साथ दीजिए । आधार आपका अधिकार है भूलिए मत
जय बाला जी महाराज 🙏🚩
जय श्री राम 🙏🚩
जय जगन्नाथ स्वामी 🙌
संत और बसंत में, एक ही समानता है
जब बसंत आता है ,तो प्रकृति सुधर जाती है ,
और संत आते है ,तो संस्कृति सुधर जाती है🙏🙏🙏जय श्री सीताराम 🚩🚩🙏🙏🌹🌹 जय सनातन धर्म की
मैंने परम आदरणीय श्री गुरुदेव को दक्षिणा दी थी लेकिन उन्हें लेने से मना कर दिया l फिर मैंने गुरुदेव से कहा मैं यह दक्षिणा श्री बागेश्वर धाम के चरणों में चढ़ना चाहता हूं l तब जाकर उन्होंने दक्षिणा स्वीकार की l
इस कलयुग में हनुमान जी से आशीर्वाद दिलवाने वाले एकमात्र श्री धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री जी हैं l जय श्री बागेश्वर धाम l26 नवम्बर 1949 को भारतीय संविधान सभा की ओर से संविधान अपनाया गया और इसे लागू किया गया. 26 जनवरी 1950 को और डॉक्टर अम्बेडकर को ही संविधान का करता बताया और प्रचारित किया जाता है उनके अनुयायियों और दलित संगठनों की तरफ से जिस से एक बड़ा सवाल पैदा होता है जो यह है👇👇👇
भारतीय संविधान की धारा 25 (बी) के तहत सब सिख,बौद्ध और जैन धर्म के लोग हिन्दू ही माने जाते है अब अगर ऐसा है तोह इसके लिखने वाले भी हुए बी आर अम्बेडकर !!!
अब इस से एक और सवाल उठता है और वोह यह के उन्होंने खुद कहा था के मैं हिन्दू धर्म मे पैदा जरूर हुआ हूं पर हिन्दू मरूँगा नही 🙄
अब कोई विद्वान यह बताए के जब उन्होंने खुद ही संविधान में सिख,बौद्ध और जैन को हिन्दू लिखा था जो एक बड़ी गलती थी तोह फिर वोह खुद बौद्ध बनकर कैसे हिन्दुओ से अलग हुए ???
यह कैसी बचकानी हरकत थी ???
क्यों नही वोह मुस्लिम या ईसाई बने जिनको अलग धर्म की मान्यता उन्होंने खुद दी थी संविधान में 🤔
अब उनके भक्त उनकी पेटी भरके डिग्रियो के होने की बात करते है पर वोह सब तोह किसी काम न आई उनके खुद के जो खुद नही निकल पाए जति व्यवस्था से तोह वोह दुसरो को क्या निकलते ।
यहाँ यह भी सवाल जरूर उठता है के अगर दलितों पर शोषण और अत्याचार होता था उनको शिक्षा नही मिलती थी तब के भारत मे तोह 32 डिग्रियां बाबा साहब के पास कैसे आई ???
कोट पेंट पहने बाबा साहब के बहुत फोटो है पर उनके भक्त कहते है दलितों को तन ढकने का अधिकार नही था देश मे 😳 यह भी गजब बात है जो समझ से बाहर है
अब कुछ उनके संविधान लिखने और जलाने पर 👇👇
आंबेडकर ने राज्य सभा में 2 सितंबर 1953 को उस बहस के दौरान यादगार शब्द कहे थे, कि मैंने संविधान बनाया है, लेकिन मैं पहला व्यक्ति होउंगा जो इसे जलाने को तैयार होगा अब अगर लोग ही कहते थे के उन्होंने संविधान बनाया है पर उनके इस कथन से लगता है के वोह खुद यह नही मानते थे तोह अब फिर एक बड़ा सवाल उठता है के असल मे संविधान बनाया किसने फिर ???
अब उनकी राजनीतिक पारी पर ।
डॉ. भीम राव अंबेडकर आजादी के बाद हुए पहले आम चुनाव में अनुसूचित जाति संघ के टिकट पर चुनाव लड़े थे, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा। 1952 में हुए पहली लोकसभा चुनाव में अम्बेडकर उत्तरी बंबई से एससीएफ पार्टी से उम्मीदवार थे और उनको एक समय उन्हीं के सहयोगी कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवार नारायण काजोलोलर ने हरा दिया था।
1954 में भंडारा में हुए लोकसभा उप चुनाव में एक बार फिर अम्बेडकर लोकसभा का चुनाव लड़े, लेकिन इस बार भी अम्बेडकर की बुरी तरह हार हुई। अम्बेडकर उपचुनाव में तीसरे नम्बर पर रहे। दूसरे लोकसभा चुनाव से पहले ही अम्बेडकर की मौत हो चुकी थी। अम्बेडकर की मौत 65 साल की उम्र में 6 दिसम्बर को 1956 में हो गयी।
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